एक तरफ सरकारी कर्मचारियों पर चुनाव में हस्तक्षेप का आरोप, दूसरी तरफ चार महिलाओं ने थाने पहुंचकर फोटो के कथित दुरुपयोग की शिकायत की—मामले ने पकड़ा तूल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में भारतीय युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। युवा कांग्रेस से जुड़े शुभम पेन्द्रों ने जहां जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायत देकर शासकीय कर्मचारियों पर चुनावी प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर चार महिलाओं ने शुभम पेन्द्रों एवं ‘न्यूज दस्तक’ पोर्टल के संचालक महेंद्र सोनवानी की भूमिका की जांच की मांग करते हुए थाना गौरेला में शिकायत दर्ज कराई है। दोनों मामलों के सामने आने के बाद जिले में राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
पहले शासकीय कर्मचारियों पर लगाए गंभीर आरोप
3 सितंबर 2026 को शुभम पेन्द्रों द्वारा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिला पंचायत की आवास शाखा से जुड़े अनिश मसीह एवं ऑपरेटर राहुल गुप्ता अपने पद एवं प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से दोनों कर्मचारियों की भूमिका और गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की मांग की है। शुभम पेन्द्रों का कहना है कि शासकीय कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों में अनुचित भागीदारी से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
अब फोटो विवाद में खुद शिकायत के घेरे में
इसी बीच 4 सितंबर को चार महिलाओं द्वारा थाना गौरेला में दी गई शिकायत ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। महिलाओं के अनुसार वे आवास शाखा प्रमुख अनीस मसीह के जन्मदिवस कार्यक्रम में शामिल हुई थीं, जहां उनकी सामूहिक फोटो ली गई थी। आरोप है कि बाद में इसी फोटो का इस्तेमाल ‘न्यूज दस्तक’ पोर्टल पर शुभम पेन्द्रों से संबंधित एक समाचार में किया गया।
महिलाओं का कहना है कि उक्त फोटो का संबंधित समाचार अथवा किसी राजनीतिक कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था और उन्होंने अपनी फोटो को समाचार या राजनीतिक प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल करने की कोई अनुमति अथवा सहमति नहीं दी थी।
“फोटो किसने दी और किस उद्देश्य से इस्तेमाल हुई?”
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से यह पता लगाने की मांग की है कि फोटो किस व्यक्ति द्वारा खींची अथवा उपलब्ध कराई गई, किस माध्यम से पोर्टल तक पहुंची और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। महिलाओं ने कथित पोस्ट के स्क्रीनशॉट एवं लिंक को भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करने की बात कही है।
उन्होंने संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट एवं फोटो हटवाने तथा जांच में किसी प्रकार का अपराध पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतों ने खड़े किए कई सवाल
एक ओर शुभम पेन्द्रों ने शासकीय कर्मचारियों पर राजनीतिक एवं चुनावी गतिविधियों में कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाकर प्रशासन से जांच की मांग की है, तो दूसरी ओर उन्हीं से जुड़े समाचार में फोटो के कथित इस्तेमाल को लेकर चार महिलाओं का पुलिस तक पहुंचना पूरे घटनाक्रम को सवालों के घेरे में ला रहा है।
अब प्रशासन और पुलिस की जांच पर नजर है। किसके आरोपों में कितना दम है, फोटो संबंधित समाचार तक कैसे पहुंची और क्या वास्तव में किसी शासकीय कर्मचारी की चुनावी गतिविधियों में भूमिका थी—इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल दोनों शिकायतों ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में राजनीतिक गतिविधियों और सोशल मीडिया पर प्रकाशित खबरों को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।








