GPM के भदौरा में PM आवास योजना पर उठे सवाल, पक्के मकान से लेकर ट्रैक्टर-कार और जमीन वालों को लाभ का आरोप
29 हितग्राहियों की पात्रता पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल, ₹40 हजार से ₹1.20 लाख तक भुगतान के दावे; जनपद CEO की जांच में खुलेगा मामला

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले की ग्राम पंचायत भदौरा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सामने आई शिकायत ने योजना के हितग्राही चयन और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने 29 हितग्राहियों की सूची प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया है कि कुछ ऐसे लोगों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं। शिकायत में कुछ हितग्राहियों के पास डबल स्टोरी मकान, ट्रैक्टर, कार, 2.5 एकड़ से अधिक भूमि और सरकारी नौकरी होने का भी दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, संबंधित हितग्राहियों के नाम पर ₹40 हजार से लेकर ₹1.20 लाख तक की राशि जारी अथवा निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब पूरे मामले की वास्तविकता जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पक्के मकान वाले हितग्राहियों पर सवाल
शिकायत में रामसिंह, रुकमीन बाई, देवकी, मुन्नीबाई, कमलदेव, गया प्रसाद, मिश्रीलाल, द्वारिका, गोमती, शीला, आशीष कुमार, अनुसुइया सोनी, लोहन, गुलाब, तुलसी, सुमन और गेंदवती सहित कई नामों के सामने पहले से पक्का मकान होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि संबंधित हितग्राहियों के पास पहले से पक्का मकान था, तो योजना के लिए उनकी पात्रता किस आधार पर तय की गई? क्या आवेदन के समय और योजना स्वीकृति से पहले मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया गया था?
डबल स्टोरी मकान के बावजूद आवास राशि मिलने का दावा
शिकायत में जनक, महेश और हिरा के संबंध में डबल स्टोरी मकान होने का उल्लेख किया गया है। इनके नाम पर करीब एक लाख रुपये तक की राशि जारी होने का दावा शिकायत में किया गया है।
इसके अलावा अन्य हितग्राहियों के नाम के सामने ₹40 हजार, ₹95 हजार और ₹1.20 लाख तक राशि जारी अथवा निकाले जाने की जानकारी होने का दावा किया गया है। यदि जांच के दौरान ये दावे सही पाए जाते हैं, तो हितग्राही चयन और सत्यापन प्रक्रिया की गंभीरता से जांच किए जाने की जरूरत होगी।
ट्रैक्टर और 2.5 एकड़ से अधिक जमीन का भी दावा
शिकायत में दीपक ठाकुर, जितेश, केशव, तोपसिंह और नवमी सहित कुछ हितग्राहियों के पास 2.5 एकड़ से अधिक भूमि होने का दावा किया गया है। वहीं केशव और तोपसिंह के पास ट्रैक्टर होने का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार नवमी और तोपसिंह के नाम पर ₹1.20 लाख तक की राशि जारी होने का दावा है। ऐसे में अब भूमि रिकॉर्ड, वाहन स्वामित्व और प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्रता संबंधी दस्तावेजों का मिलान जांच का अहम हिस्सा होगा।
कार, ट्रैक्टर और सरकारी नौकरी होने का भी आरोप
शालिनी/अवध के संबंध में शिकायत में कार, ट्रैक्टर और सरकारी नौकरी होने का दावा किया गया है। इसी तरह गुंजन/संतोष के मामले में GST Payment का उल्लेख करते हुए ₹95 हजार राशि जारी होने का दावा किया गया है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए यह जरूरी है कि संबंधित विभाग रिकॉर्ड के आधार पर इन तथ्यों की जांच करे और वास्तविक स्थिति सामने रखे।
पति-पत्नी दोनों को लाभ मिलने का आरोप
शिकायत में थामन/खज्जू के मामले में पति-पत्नी दोनों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने का भी आरोप लगाया गया है। यदि ऐसा हुआ है तो यह भी जांच का विषय होगा कि दोनों लाभार्थियों की पारिवारिक स्थिति क्या थी और योजना के नियमों के तहत दोनों के नाम से लाभ स्वीकृत किया जाना नियमसम्मत था या नहीं।
29 नामों से आगे बढ़कर पूरी प्रक्रिया पर सवाल
भदौरा की शिकायत सिर्फ 29 हितग्राहियों की पात्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही चयन प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन, स्थल निरीक्षण, जियो-टैगिंग और भुगतान व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी हितग्राही के पास पहले से पक्का मकान, वाहन या पर्याप्त भूमि जैसी स्थिति थी, तो योजना की प्रक्रिया के दौरान इसका पता क्यों नहीं चला? क्या भौतिक सत्यापन सही तरीके से किया गया था? इन सवालों का जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
जनपद CEO की जांच से साफ होगी तस्वीर
अब पूरे मामले में जनपद पंचायत CEO की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिकायत में शामिल प्रत्येक नाम की मौके पर जांच के साथ मकान की स्थिति, भूमि रिकॉर्ड, वाहन स्वामित्व, सरकारी सेवा से संबंधित जानकारी, परिवार की पात्रता और बैंक खाते में हुए भुगतान का मिलान किया जाना जरूरी है।
यदि जांच में किसी हितग्राही को नियमों के विपरीत लाभ दिए जाने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार राशि की वसूली और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की कार्रवाई हो सकती है।
गरीबों के लिए बनी योजना में पारदर्शिता जरूरी
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य पात्र और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि जांच के दौरान अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिए जाने की पुष्टि होती है, तो यह वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
- फिलहाल भदौरा में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और किसी भी हितग्राही या जिम्मेदार व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले आधिकारिक जांच रिपोर्ट का सामने आना जरूरी है। अब निगाहें जनपद पंचायत की जांच पर टिकी हैं कि 29 नामों की शिकायत में कितनी सच्चाई सामने आती है और यदि अनियमितता मिलती है तो प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है। यह देखने वाली बात होगी ।








