सर्व शिक्षा अभियान मरवाही की वित्तीय अनियमितता पर जांच प्रतिवेदन मांगने के बाद भी चुप्पी; आखिर किसके दबाव में अटकी रिपोर्ट?
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में सर्व शिक्षा अभियान मरवाही की राशि में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अब सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच रिपोर्ट को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जीपीएम को लिखित पत्र दिए हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज पर्यंत उन्हें जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जिला पंचायत अध्यक्ष स्वयं लिखित रूप से जांच प्रतिवेदन और संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांग रही हैं, तो एक महीने से अधिक समय बाद भी रिपोर्ट आखिर कहां अटकी हुई है?
7 अगस्त को पत्र, लेकिन अब तक रिपोर्ट का इंतजार
जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा ने 7 अगस्त 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जीपीएम को पत्र भेजा था। पत्र में सर्व शिक्षा अभियान मरवाही की राशि में वित्तीय अनियमितता से संबंधित जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
पत्र में स्पष्ट रूप से संबंधित मामले की जांच रिपोर्ट तथा आवश्यक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। लेकिन पत्र दिए जाने के बाद भी अब तक रिपोर्ट नहीं मिलने से प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच हुई तो रिपोर्ट दिखाने में इतनी हिचक क्यों?
मामला सरकारी राशि में कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। ऐसे मामलों में जांच का उद्देश्य ही तथ्यों को सामने लाना और जिम्मेदारी तय करना होता है। लेकिन यहां स्थिति यह है कि जांच रिपोर्ट के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष को ही इंतजार करना पड़ रहा है।
यदि जांच पूरी हो चुकी है तो रिपोर्ट उपलब्ध कराने में परेशानी क्या है?
यदि जांच पूरी नहीं हुई है तो अब तक जांच लंबित रखने का कारण क्या है?
और यदि जांच रिपोर्ट तैयार है, तो उसे संबंधित जिला पंचायत अध्यक्ष को उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया?
इन सवालों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
‘फाइल दबाकर रखने’ से नहीं दबेंगे सवाल
सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर जांच रिपोर्ट कोई सामान्य कागज नहीं होती। यह वह दस्तावेज है, जिससे यह स्पष्ट हो सकता है कि आरोप सही थे या निराधार, सरकारी राशि का उपयोग नियमों के मुताबिक हुआ या नहीं और यदि गड़बड़ी हुई तो जिम्मेदार कौन है।
ऐसे में एक माह से अधिक समय तक जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होना अपने आप में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। रिपोर्ट जितनी देर दबेगी, संदेह उतना ही गहराएगा।
अब जवाबदेही तय करने की जरूरत
जिला पंचायत अध्यक्ष के पत्र के बावजूद यदि जांच रिपोर्ट अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि रिपोर्ट किस स्तर पर लंबित है और इसे उपलब्ध कराने में देरी का कारण क्या है।
सर्व शिक्षा अभियान की राशि जनता के पैसे से जुड़ी है। ऐसे में जांच रिपोर्ट को लेकर रहस्य बरकरार रखना सवालों को जन्म देता है।
अब निगाहें जिला पंचायत प्रशासन पर हैं कि आखिर कब तक जांच रिपोर्ट सामने आती है और वित्तीय अनियमितता के इस मामले में जांच का वास्तविक निष्कर्ष क्या निकलता है।








