गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के नगर पंचायत मरवाही में लोकार्पण के कुछ ही महीनों बाद प्रतिमा के चेहरे, सीने, पैरों और शरीर के कई हिस्सों में दरारें दिखाई दीं। तस्वीरें सामने आने के बाद निर्माण गुणवत्ता और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के नगर पंचायत मरवाही में स्थापित भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा, जिसे पूरे सम्मान और गरिमा के साथ स्थापित किया गया था, अब अपनी खराब स्थिति को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। नगर पंचायत मरवाही में स्थापित इस प्रतिमा के लोकार्पण के कुछ ही महीनों के भीतर इसके कई हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी हैं।
सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि प्रतिमा के चेहरे, गर्दन, सीने, पेट, पैरों और अन्य हिस्सों में जगह-जगह लंबी और महीन दरारें उभर आई हैं। कुछ स्थानों पर दरारें इतनी स्पष्ट हैं कि पहली नजर में ही दिखाई देती हैं। यह स्थिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रतिमा धातु (मेटल) की बताई गई थी। आमतौर पर धातु की प्रतिमाओं को मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ माना जाता है। ऐसे में लोकार्पण के कुछ ही महीनों के भीतर इस तरह की दरारें दिखाई देना लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, धातु में भी कुछ परिस्थितियों में दरारें आ सकती हैं, लेकिन इसकी वास्तविक वजह केवल तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक स्मारक या प्रतिमा का उद्देश्य वर्षों तक प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक बने रहना होता है। लेकिन जब कुछ ही महीनों में प्रतिमा इस स्थिति में पहुंच जाए, तो यह स्वाभाविक है कि लोग निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी निगरानी पर सवाल उठाएं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रतिमा का लोकार्पण पूरे सम्मान के साथ किया गया था, तब क्या निर्माण कार्य का गुणवत्ता परीक्षण किया गया था? यदि किया गया था, तो फिर इतनी जल्दी दरारें कैसे पड़ गईं?
यह भी सवाल उठ रहा है कि निर्माण में उपयोग की गई सामग्री तय मानकों के अनुरूप थी या नहीं। यदि गुणवत्ता में कोई कमी नहीं थी, तो इतनी कम अवधि में प्रतिमा का इस तरह क्षतिग्रस्त होना आखिर किस कारण से हुआ? क्या निर्माण एजेंसी ने मानकों का पालन किया था? क्या संबंधित विभाग ने कार्य का सही तरीके से निरीक्षण किया था?
जनता का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन और जनभावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे स्मारक समाज के सम्मान और इतिहास का प्रतीक होते हैं। इसलिए इनकी गुणवत्ता और मजबूती पर किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
अब लोगों की नजर संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों पर है। सभी यह जानना चाहते हैं कि प्रतिमा में आई दरारों की तकनीकी जांच कब होगी, इसके लिए जिम्मेदार कौन है, और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई की जाएगी? साथ ही यह भी अपेक्षा की जा रही है कि प्रतिमा की जल्द मरम्मत कर उसे फिर से सम्मानजनक स्थिति में लाया जाए।








