पर्यटन, जनजातीय संस्कृति और ग्रामीण विकास पर कलेक्टर का फोकस, राजमेरगढ़ व कबीर चबूतरा का किया निरीक्षण
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पर्यटन, जनजातीय संस्कृति और ग्रामीण विकास को नई गति देने की दिशा में कलेक्टर विजय दयाराम के. ने शनिवार को राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा, अगरियापारा, छोटकीरेवार और केवची क्षेत्र का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने और स्थानीय संसाधनों को पर्यटन एवं रोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए।
राजमेरगढ़ में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बैगा समुदाय के पारंपरिक आवासों को होम-स्टे के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार व आय के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही राजमेरगढ़ के ट्रेकिंग प्वाइंट को विकसित कर साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
इसके बाद कलेक्टर ने जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल कबीर चबूतरा का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां निर्मित सीसी रोड का जायजा लिया तथा क्रेडा विभाग को सोलर ड्यूल पंप का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सामुदायिक शौचालय निर्माण पर भी अधिकारियों के साथ चर्चा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने चरण कुंड, कबीर वट सहित अन्य स्थलों के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की जानकारी ली। स्थानीय लोगों ने बताया कि श्रावण माह के प्रत्येक सोमवार और पूर्णिमा के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
अगरियापारा स्थित बहुउद्देशीय केंद्र में कलेक्टर ने केवची वन धन केंद्र के संग्रहण हेतु कक्ष आवंटित करने और उसके नियमित संचालन के निर्देश दिए। वहीं छोटकीरेवार के आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की तथा गर्भवती महिलाओं की संख्या और मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता की जानकारी ली।
इसके अलावा कलेक्टर ने केवची में प्रस्तावित जनजातीय संग्रहालय के लिए उपयुक्त स्थल का चयन करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। निरीक्षण के दौरान वनमंडलाधिकारी श्रीमती ग्रीष्मी चांद, भारतीय वन सेवा प्रशिक्षु अधिकारी गौतम पडिभार, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा, एसडीएम पेंड्रारोड अमित बेक, सरपंच श्रीमती सुरंजना आयाम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन का यह प्रयास पर्यटन विकास के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








