ऑनलाइन सट्टा और फर्जी वेबसाइट से करोड़ों की धोखाधड़ी मामले में बड़ा फैसला, 7 आरोपी दोषी, 4 बरी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | पेण्ड्रारोड न्यायालय ने ऑनलाइन सट्टा और फर्जी वेबसाइट के जरिए धोखाधड़ी के चर्चित मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 7 आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कु. सीमा जगदल्ला की अदालत ने दोषी पाए गए आरोपियों को 3-3 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है, जबकि साक्ष्य के अभाव में 4 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
न्यायालय ने प्रकाश केंवट, हर्ष जायसवाल, रितेश सुल्तानिया उर्फ गुनगुन, मधुर जैन, योगेश देवांगन, विनायक ताम्रकार और राजकुमार कश्यप को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 (कूटरचना एवं जालसाजी) के तहत दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 3 वर्ष का साधारण कारावास एवं 100-100 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा-6 के तहत भी सभी सातों दोषियों को 3 वर्ष का कारावास तथा 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इस मामले में शासन की ओर से एडीपीओ कु. सुचिता सिंह ने प्रभावी पैरवी की।
वहीं, न्यायालय ने अजय यादव, जितेन्द्र सोनवानी, राहुल कोरी और अनुराग सोनी को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। साथ ही, आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D के तहत लगाए गए आरोपों से भी सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
यह मामला मई 2024 का है, जब तत्कालीन एसपी भावना गुप्ता के निर्देशन में तत्कालीन एसडीओपी एवं क्राइम ब्रांच प्रभारी दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पेण्ड्रा थाना पुलिस और साइबर सेल की टीम ने ग्राम छपराटोला (दुबटिया) में छापेमार कार्रवाई की थी। पुलिस ने आईपीएल क्रिकेट मैचों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित करते हुए आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा था।
जांच में खुलासा हुआ था कि आरोपी ‘Rajaranibook.com’ नाम की फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क चला रहे थे। सट्टे से होने वाले लेन-देन के लिए फर्जी सिम कार्ड और अन्य लोगों के बैंक खातों का उपयोग किया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महंगे मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, फर्जी सिम कार्ड, बायोमेट्रिक स्कैनर मशीन, नकदी और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए थे। न्यायालय ने जब्त 4,500 रुपये की सट्टा राशि शासन के पक्ष में राजसात करने तथा मामले में जब्त वाहनों और मोबाइल फोन को उनके पंजीकृत स्वामियों को लौटाने का आदेश भी दिया है।
यह फैसला ऑनलाइन सट्टा और साइबर धोखाधड़ी के मामलों में कानून के सख्त रुख का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।








